Monster Incharge

life in Asthenosphere

तुम

अक्सर मैं ’तुम’ हो जाता हूँ,
एक आईने में खो जाता हूँ; 
चाँदनी से अंधेरे में,
धुंद के वीराने में

लफ़्ज़ों के फसाने में,
सुर हैं कुछ झरनों के,
रंग हैं कुछ झिलमिल से,
और कहीं दूर एक जलतरंग है,
मेरा साया ही मेरे संग है,
इस लफ़्ज़ों के फसाने में

मैं खो जाता हूँ,
शायद मैं ’तुम’ हो जाता हूँ