Monster Incharge

life in Asthenosphere

hope!

अंदर तक जला के, और खुद को दफ़ना के;

                           भी देख लिया मैने

आरज़ू है के इक बार जली बुझती ही नही.

बारिश की बूँदों से हाथ भीगे तो ज़रूर,

पर इस तरह तो नीर से मुट्ठी भरती ही नही.

और ख़यालों ने की कुछ इस तरह से बेवफ़ाई हम से,

के अब तो तेरी याद भी आ कर तड़पाती  ही नही.