Monster Incharge

life in Asthenosphere

इस बार तो हंस ही देंगे गम की जो आमद होगी
गम भी खुश  होगा मेरी खुशामद देख कर


अपने चेहरे पे हमने एक भी शीकन  पड़ने ना दी
अशक सूखे हैं किसी को ना ये गुमा होगा


चाक  गहरे हैं सीने  की हिमत्त ना रही
बस इक गिनती है जो  उंगलियों पे किया करते हैं


डरता है के बारिश हो ना जाए मेरे बंज़र पे
कुछ इस कदर सहमा है  ‘रब खली’ मौत के डर से


क ल म रोती रही क्ल रत कुछ काग़ज़ के पन्नो पे
फलसफा लिखने जो लगा वो तेरी महोबत का