December 2008
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go green
दिल-ए-गुल्फाम से निकले तो वीराँ आया,
वो तेरी झील से आँखों का इक सलाम आया,
तेरे आगोश से निकलेंगे तो खबर होगी हमें,
खुदा कहाँ से तेरी आँखों के हरे रंग लाया,
उसके लब की एक धर्ध्राहट से,
पत्थर के दिल मैं भी इक अरमां आया,
यूं तो और भी तरीके थे कत्ल करने के,
रब को जाने क्यों तेरा ही ख्याल आया !
zinda hoon
जो जी न पाया जिन्दा हूँ उस पल क लिए वो पल जो जिंदगी मैं कभी आया ही नहीं, हकीक़त क्या सपने मैं भी उसे जी पाया नहीं, न सोचा आज क्या होगा न सोचा खभी कल क लिए जो जी न पाया जिन्दा हूँ उस पल क लिए. उस पल क लिए मैंने जिंदगी को फ़ना कर दिया, फिर मौत ने आगोश मैं लेने से मना कर दिया, उसके पास भी कब वक़त था मुझ पागल क लिए जो जी न पाया जिंदा हूँ उस पल क लिए मेरी जिंदगी को मकसद उसको जिंदगी मैं लाना था,...